वॉशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Donald Trump प्रशासन ने एक ऐसे प्रस्तावित बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है, जिसके तहत भारत और चीन से जुड़े कुछ आयात–निर्यात पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की बात कही जा रही है। इससे पहले Venezuela को लेकर अमेरिका का रुख काफी आक्रामक रहा है, और अब फोकस एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की ओर जाता दिख रहा है।
क्या है 500% टैरिफ वाला बिल?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रस्ताव राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार असंतुलन के तर्क पर आधारित है। इसके तहत United States में होने वाले निर्यात पर भारत और चीन से जुड़ी कुछ श्रेणियों पर असाधारण रूप से ऊंचा आयात शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि, किन उत्पादों पर और कब से यह लागू होगा—इस पर आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है।
भारत और चीन पर क्या असर?
- निर्यात महंगा होने से दोनों देशों की कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है।
- आईटी, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर दबाव में आ सकते हैं।
- जवाबी कदम के तौर पर प्रतिउत्तर टैरिफ या WTO में चुनौती जैसे विकल्पों पर विचार संभव है।
वैश्विक बाजारों में चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 500% टैरिफ जैसा कठोर कदम लागू होता है, तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन, शेयर बाजारों और मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है। इससे पहले अमेरिका–चीन व्यापार तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा की थी।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर India और China की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया सीमित है। विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस की प्रक्रिया, कानूनी समीक्षा और राजनयिक वार्ता के बाद ही अंतिम तस्वीर साफ होगी।
निष्कर्ष: वेनेजुएला के बाद भारत–चीन पर संभावित सख्ती की खबरें वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा संकेत हैं, लेकिन निवेशकों और उद्योगों को आधिकारिक अधिसूचना और नीतिगत स्पष्टता का इंतजार करना चाहिए।
फोकस कीफ्रेज़: 500 प्रतिशत टैरिफ बिल, ट्रंप प्रशासन, भारत चीन टैरिफ, US ट्रेड पॉलिसी, वैश्विक व्यापार तनाव
कैप्शन: अमेरिका में प्रस्तावित 500% टैरिफ बिल से भारत–चीन के साथ व्यापार संबंधों पर असर की आशंका

